35 दिनों की स्कूल छुट्टियों का ऐलान, स्कूल जाने वाले बच्चों की हो गई बल्ले-बल्ले School Holiday

School Holiday: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के शिक्षा विभाग ने करीब 10 साल बाद शैक्षणिक सत्र और स्कूल संचालन व्यवस्था में बड़ा ...

Ravi Yadav

School Holiday: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के शिक्षा विभाग ने करीब 10 साल बाद शैक्षणिक सत्र और स्कूल संचालन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के लगभग 70 लाख विद्यार्थियों पर पड़ेगा, जो 70 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत हैं।

अब तक राज्य में नया शिक्षा सत्र 1 जुलाई से शुरू होता था, लेकिन विभाग ने इसे बदलते हुए 1 अप्रैल से लागू करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव को प्रशासनिक और शैक्षणिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य पढ़ाई को व्यवस्थित करना और भीषण गर्मी से बच्चों को राहत देना है।

क्यों बदला गया सत्र का समय

पिछले एक दशक से प्रदेश में जुलाई से सत्र शुरू होने की परंपरा चल रही थी। लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों का मानना था कि जुलाई से सत्र शुरू होने पर शैक्षणिक समय का नुकसान होता है। कई बार प्रवेश प्रक्रिया, पुस्तक वितरण और अन्य प्रशासनिक कारणों से पढ़ाई देर से शुरू होती थी। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अब निर्णय लिया गया है कि नया सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ होगा, ताकि अप्रैल और मई के महीनों में पढ़ाई का पूरा समय मिल सके और वार्षिक पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो सके।

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15 मई तक नियमित पढ़ाई

नए कैलेंडर के अनुसार, 1 अप्रैल से सभी सरकारी स्कूल खुल जाएंगे और विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई 15 मई तक लगातार चलेगी। इस दौरान कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित होंगी और वार्षिक पाठ्यक्रम की शुरुआत समय पर हो सकेगी। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अप्रैल और मई की शुरुआत में मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है। जिससे बच्चे बेहतर तरीके से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

16 मई से 20 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश

राजस्थान में मई और जून के महीनों में भीषण गर्मी पड़ती है। इसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने 16 मई से 20 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया है। यानी करीब 35 दिनों से अधिक की लंबी छुट्टियां विद्यार्थियों को मिलेंगी। यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। तेज गर्मी में स्कूल संचालन से बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए यह अवकाश एक राहत के रूप में देखा जा रहा है।

21 जून से फिर शुरू होगा संचालन

ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 21 जून से स्कूलों का संचालन फिर से शुरू होगा। इस समय तक मानसून की शुरुआत हो जाती है, जिससे तापमान में कमी आती है और पढ़ाई का माहौल बेहतर बनता है। इस तरह पूरे शैक्षणिक सत्र को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों का संतुलन बना रहे।

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70 लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ

प्रदेश के करीब 70 हजार सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 70 लाख विद्यार्थियों को इस बदलाव से सीधा फायदा होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि अप्रैल से सत्र शुरू करने से शिक्षण घंटे बढ़ेंगे और पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने में आसानी होगी। पहले जुलाई से सत्र शुरू होने के कारण कई बार पढ़ाई में व्यवधान आता था। लेकिन अब अप्रैल से शुरुआत होने पर शुरुआती दो महीनों में ही मजबूत अकादमिक नींव रखी जा सकेगी।

अभिभावकों के लिए क्या है खास

अभिभावकों के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है कि अब उन्हें बच्चों के एडमिशन, किताबें और अन्य तैयारियां मार्च के अंत तक पूरी करनी होंगी। साथ ही 16 मई से शुरू होने वाली लंबी छुट्टियां परिवारों के लिए भी राहत लेकर आएंगी। बच्चे इस दौरान अपनी हॉबी क्लासेस जॉइन कर सकते हैं, खेल-कूद में भाग ले सकते हैं या रिश्तेदारों के यहां जाने की योजना बना सकते हैं।

शिक्षकों की तैयारी पर भी असर

इस बदलाव का असर शिक्षकों पर भी पड़ेगा। अब शिक्षकों को नए सत्र की तैयारी मार्च के अंत तक पूरी करनी होगी। वार्षिक योजना, पाठ्यक्रम वितरण और कक्षा आवंटन जैसे कार्य पहले ही निपटाने होंगे। हालांकि विभाग का मानना है कि यह बदलाव शिक्षकों को भी अधिक व्यवस्थित ढंग से पढ़ाने का अवसर देगा।

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गर्मी से सुरक्षा और पढ़ाई में सुधार

राजस्थान जैसे राज्य में जहां मई-जून में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, वहां स्कूल संचालन बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए गर्मी की छुट्टियों का समय तय करना एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बच्चों की सेहत सुरक्षित रहेगी, बल्कि अप्रैल और मई के महीनों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई भी संभव हो सकेगी।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम

शिक्षा विभाग का यह निर्णय केवल कैलेंडर बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने की दिशा में एक सुधारात्मक कदम है। 10 साल बाद हुए इस बड़े बदलाव से यह संकेत मिलता है कि विभाग अब समय और परिस्थितियों के अनुसार नीतियों में बदलाव करने के लिए तैयार है।

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