घर खरीदना है तो मत करना ये 7 गलतियां, वरना जिंदगी भर चुकानी पड़ेगी कीमत Home Buying Tips

Home Buying Tips: अपना खुद का घर या फ्लैट लेना हर व्यक्ति का सपना होता है। लोग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगा देते हैं और कई सालों तक बैंक की ईएमआई भरते हैं। लेकिन रियल एस्टेट की दुनिया में ...

Ravi Yadav

Home Buying Tips: अपना खुद का घर या फ्लैट लेना हर व्यक्ति का सपना होता है। लोग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगा देते हैं और कई सालों तक बैंक की ईएमआई भरते हैं। लेकिन रियल एस्टेट की दुनिया में जरा सी लापरवाही आपको भारी नुकसान में डाल सकती है। अक्सर खरीदार सोचते हैं कि उन्होंने सब कुछ जांच लिया है। लेकिन बाद में कागजी गड़बड़ी, छिपे खर्चे या कानूनी विवाद सामने आ जाते हैं। इसलिए किसी भी प्रॉपर्टी पर साइन करने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है।

मालिकाना हक की पूरी जांच करें

घर खरीदने से पहले सबसे पहला कदम है मालिकाना हक की जांच। जो व्यक्ति घर बेच रहा है, क्या वही असली मालिक है? क्या उसके पास प्रॉपर्टी बेचने का पूरा अधिकार है? इसके लिए तहसील या रजिस्ट्री कार्यालय से भार मुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate) जरूर लें। इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी पर कोई पुराना लोन, बैंक कर्ज या कानूनी विवाद तो नहीं है। अगर मामला कोर्ट में लंबित है, तो ऐसी संपत्ति से दूरी बनाना ही समझदारी है।

रेरा रजिस्ट्रेशन जरूर देखें

अगर आप नया फ्लैट या अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में घर ले रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड हो। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) की मांग अवश्य करें। बिना OC के घर में रहना कानूनी रूप से गलत माना जाता है। साथ ही बिल्डर से पूछें कि प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा और क्या उसका नक्शा सरकारी विभाग से पास है या नहीं।

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लोकेशन का महत्व समझें

प्रॉपर्टी की कीमत और भविष्य उसकी लोकेशन पर निर्भर करता है। घर फाइनल करने से पहले यह देखें कि वहां से ऑफिस, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक परिवहन की दूरी कितनी है। यह भी जांचें कि उस इलाके में आने वाले समय में कौन से विकास कार्य प्रस्तावित हैं। सर्किल रेट के अनुसार प्रॉपर्टी की कीमत तय करें, ताकि रजिस्ट्री के समय कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।

छिपे हुए खर्चों का पूरा हिसाब रखें

अधिकतर लोग सिर्फ घर की मूल कीमत को ही अपना बजट मान लेते हैं। लेकिन असल खर्चे इसके बाद शुरू होते हैं। आपको स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्री चार्ज, GST, होम लोन प्रोसेसिंग फीस और वकील की फीस भी चुकानी पड़ती है। अगर इन खर्चों का पहले से अंदाजा नहीं लगाया गया, तो आखिरी समय में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

साइट विजिट करना न भूलें

घर चाहे नया हो या पुराना, केवल फोटो या ब्रोशर देखकर फैसला न लें। खुद जाकर जांच करें कि घर में धूप और हवा का सही इंतजाम है या नहीं। पानी की सप्लाई, बिजली कनेक्शन और सीवर सिस्टम की स्थिति को ध्यान से परखें। अगर बिल्डिंग निर्माणाधीन है, तो इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता देखें।

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विशेषज्ञ की सलाह लें

अगर संभव हो तो किसी इंजीनियर या रियल एस्टेट विशेषज्ञ को साथ लेकर जाएं। वे दीवारों, छत और संरचना की मजबूती का सही आकलन कर सकते हैं। कानूनी दस्तावेजों की जांच के लिए वकील से सलाह लेना भी सुरक्षित विकल्प है।

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