Unique Wedding Tradition: आमतौर पर शादी को खुशियों, संगीत और नाच-गाने का अवसर माना जाता है। हर कोई चाहता है कि दूल्हा-दुल्हन की नई जिंदगी की शुरुआत प्यार और सम्मान के साथ हो। लेकिन दुनिया में एक ऐसी परंपरा भी है। जहां शादी से पहले दूल्हे का स्वागत फूलों से नहीं, बल्कि कीचड़, अंडे और गंदगी से किया जाता है। यह सुनने में भले ही अजीब लगे। लेकिन यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।
क्या है ‘ब्लैकनिंग ऑफ द ग्रूम’?
स्कॉटलैंड के कुछ हिस्सों में शादी से पहले एक खास रस्म निभाई जाती है, जिसे “ब्लैकनिंग ऑफ द ग्रूम” कहा जाता है। इस परंपरा में दूल्हे को उसके दोस्त और रिश्तेदार पकड़ लेते हैं और उसके शरीर पर कीचड़, राख, अंडे और कई बार बदबूदार चीजें भी लगा देते हैं। इसके बाद दूल्हे को उसी हालत में इलाके में घुमाया जाता है।
कहां निभाई जाती है यह रस्म?
यह अनोखी रस्म स्कॉटलैंड के ग्रामीण इलाकों में अधिक प्रचलित है। हालांकि यह पूरे देश में आम नहीं है, लेकिन जिन क्षेत्रों में यह परंपरा जिंदा है, वहां इसे पूरे उत्साह के साथ निभाया जाता है। स्थानीय लोग इसे अपमान नहीं, बल्कि हंसी-मजाक और सामुदायिक उत्सव का हिस्सा मानते हैं।
दूल्हे की हल्की पिटाई क्यों?
इस रस्म के दौरान दूल्हे के साथ हल्की-फुल्की मारपीट भी की जाती है। लोगों का मानना है कि इससे दूल्हा मानसिक रूप से मजबूत बनता है और शादी के बाद आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार होता है। उनका विश्वास है कि जो व्यक्ति इस रस्म के दौरान अपमान और असुविधा सह लेता है, वह वैवाहिक जीवन की कठिनाइयों को भी धैर्य से संभाल सकता है।
पूरे गांव में घुमाने की परंपरा
रस्म के बाद दूल्हे को उसी गंदी हालत में पूरे गांव या कस्बे में घुमाया जाता है। रास्ते में लोग हंसते हैं। मजाक करते हैं और तस्वीरें लेते हैं। बाहरी लोगों को यह अपमानजनक लग सकता है, लेकिन वहां के समाज में इसे खुशी और एकजुटता का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता क्या कहती है?
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रस्म से बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। गंदगी और अपमान के जरिए दूल्हे को अहंकार से दूर रखने और जमीन से जुड़े रहने का संदेश दिया जाता है। यह रस्म समुदाय को जोड़ने और रिश्तों में अपनापन बढ़ाने का माध्यम मानी जाती है।
आधुनिक दौर में भी क्यों कायम?
दुनिया भले ही आधुनिक हो गई हो, लेकिन स्कॉटलैंड के कुछ क्षेत्रों में लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना चाहते हैं। नई पीढ़ी भी इस परंपरा को सजा या अपमान नहीं मानती, बल्कि इसे यादगार अनुभव के रूप में स्वीकार करती है। दोस्तों और परिवार के साथ यह रस्म शादी से पहले का खास पल बन जाती है।






