Rat Control in Farming: खेती-किसानी में चूहों का आतंक कोई नई समस्या नहीं है। लेकिन हाल के वर्षों में यह संकट और गंभीर होता जा रहा है। बारिश, बेमौसम मौसम और जलभराव के कारण जब खेतों में चूहों के बिलों में पानी भर जाता है, तो वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में गोदामों, पैक हाउस और घरों की ओर भागते हैं। यहां पहुंचकर वे सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि महंगे बोरों, प्लास्टिक क्रेट, तारों और अन्य सामानों को भी कुतर देते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता है। महाराष्ट्र के एक किसान ने इसी समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।
चूहों से होने वाला भारी नुकसान
चूहे बेहद चालाक और तेज होते हैं। वे थोड़े समय में ही बड़ी मात्रा में अनाज को बर्बाद कर सकते हैं। जब गोदामों में चूहों का प्रवेश होता है, तो वे चना, गेहूं, धान और अन्य फसलों के बोरों को फाड़ देते हैं। इससे न सिर्फ अनाज खराब होता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी गिर जाती है। कई बार किसान पारंपरिक जहर या जाल का उपयोग करते हैं, लेकिन चूहे धीरे-धीरे इन तरीकों को पहचान लेते हैं और उनसे बचने लगते हैं।
पारंपरिक जहर क्यों हो रहा बेअसर?
आमतौर पर किसान बाजार में मिलने वाले जिंक फॉस्फाइड जैसे चूहा मार जहर को आटे की गोलियों में मिलाकर रखते हैं। लेकिन चूहों की सूंघने की क्षमता बहुत तेज होती है। वे जहर की गंध को पहचान लेते हैं और उसे खाने से बचते हैं। इस वजह से पारंपरिक तरीका कई बार कारगर साबित नहीं होता।
नया ‘देसी’ समाधान
इसी चुनौती को देखते हुए महाराष्ट्र के किसान ने एक नया प्रयोग किया। उन्होंने जहर को सीधे आटे में मिलाने की बजाय देसी दारू (शराब) के साथ मिलाकर एक तरल मिश्रण तैयार किया। किसान का दावा है कि चूहे शराब की गंध की ओर तेजी से आकर्षित होते हैं। वे इसे पानी समझकर पी लेते हैं, जिससे जहर की गंध पूरी तरह दब जाती है।
मिश्रण तैयार करने की विधि
इस प्रयोग के लिए किसान ने लगभग 50 मिलीलीटर देसी शराब ली। उसमें करीब एक लीटर पानी मिलाया गया। इसके बाद बाजार में उपलब्ध जिंक फॉस्फाइड का एक पैकेट इस मिश्रण में डाला गया। लकड़ी की मदद से इसे अच्छी तरह मिलाया गया, ताकि जहर पूरी तरह घुल जाए। शराब की तेज गंध जहर की गंध को छुपा देती है, जिससे चूहे बिना शक किए इसे पी लेते हैं।
कैसे काम करता है यह तरीका?
मिश्रण तैयार होने के बाद इसे उन जगहों पर रखा गया जहां चूहों की आवाजाही अधिक थी, जैसे अनाज के बोरों के पास या गोदाम के कोनों में। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, मात्र 5 मिनट के भीतर चूहे उस स्थान पर जमा होने लगे। शराब की गंध से आकर्षित होकर वे जहरीला मिश्रण पीने लगे। प्यास लगने पर वे इसे बार-बार पीते रहे, जिससे जहर का प्रभाव तेजी से हुआ।
परिणाम ने सबको चौंकाया
अगली सुबह जब किसान ने अपने गोदाम की जांच की, तो वहां दर्जनों चूहे मृत पाए गए। इस तरीके ने पारंपरिक जहर की तुलना में अधिक प्रभावी परिणाम दिए। किसान का कहना है कि यह तरीका उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो चूहों के कारण भारी नुकसान झेल रहे हैं।
सावधानी भी जरूरी
हालांकि यह तरीका कारगर बताया जा रहा है, लेकिन जिंक फॉस्फाइड जैसे जहर का उपयोग करते समय सावधानी बेहद जरूरी है। मिश्रण को बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें। सुरक्षा दस्ताने पहनकर ही इसे तैयार करें और उपयोग के बाद स्थान को साफ करें।






