Flight New Rules: नागर विमानन मंत्रालय ने विमान में खतरनाक वस्तुओं के परिवहन को लेकर संशोधित नियम अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब प्रमाणन-आधारित और जवाबदेही-आधारित व्यवस्था लागू की गई है, जिससे हवाई सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। इन नियमों को “विमान (खतरनाक वस्तुओं का परिवहन) नियम, 2026” के नाम से 17 फरवरी को अधिसूचित किया गया। यह फैसला व्यापक परामर्श के बाद लिया गया है। सरकार का उद्देश्य है कि विमान में ऐसी किसी भी वस्तु का परिवहन पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों के तहत हो, जिससे यात्रियों, संपत्ति और पर्यावरण को कोई खतरा न हो।
क्या होती हैं खतरनाक वस्तुएं?
खतरनाक वस्तुओं से आशय उन पदार्थों या सामान से है जो स्वास्थ्य, सुरक्षा, संपत्ति या पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। इनमें ज्वलनशील पदार्थ, विस्फोटक सामग्री, रसायन, गैस सिलेंडर, बैटरी जैसे सामान शामिल हो सकते हैं। अगर इनका सही तरीके से पैकिंग और लेबलिंग न हो, तो उड़ान के दौरान गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
जानकारी देने के नियम हुए सख्त
नए नियमों में खतरनाक वस्तुओं की आवाजाही के बारे में जानकारी देने की प्रक्रिया को और सख्त बनाया गया है। अब यदि कोई शिपर या कंपनी गलत या अधूरी जानकारी देकर खतरनाक सामान विमान में भेजती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। अघोषित खतरनाक वस्तुओं को लेकर जाने की स्थिति में जवाबदेही तय की जाएगी।
DGCA को मिले व्यापक अधिकार
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को इन नियमों के तहत विशेष अधिकार दिए गए हैं। यदि खतरनाक वस्तुओं के प्रबंधन में चूक पाई जाती है। तो DGCA को जांच के आदेश देने और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इससे निगरानी तंत्र अधिक मजबूत होगा और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
2003 के नियमों की जगह नया ढांचा
विमानन उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 2003 में बने नियम मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुरूप परिचालन अनुपालन पर आधारित थे। लेकिन 2026 के नए नियमों में अनुपालन-आधारित ढांचे से हटकर प्रमाणन और जवाबदेही आधारित प्रणाली लागू की गई है। इसमें औपचारिक स्वीकृतियां, स्पष्ट निगरानी चक्र और व्यवस्थित प्रवर्तन शक्तियां शामिल हैं।
भारतीय एयरलाइंस के लिए प्रमाणन अनिवार्य
नए प्रावधानों के तहत भारतीय एयरलाइंस को खतरनाक वस्तुओं के परिवहन के लिए DGCA से प्रमाणन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बिना प्रमाणन के कोई भी एयरलाइन ऐसी वस्तुओं को विमान में ले जाने की अनुमति नहीं पाएगी। यह कदम सुरक्षा मानकों को एकरूप बनाने के लिए उठाया गया है।
विदेशी एयरलाइंस को भी लेनी होगी अनुमति
यदि कोई विदेशी विमानन कंपनी भारत से या भारत के लिए खतरनाक वस्तु ले जाना चाहती है, तो उसे पूर्व-अनुमति लेनी होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
‘ओवरपैक’ का क्या मतलब है?
नियमों के अनुसार कोई भी शिपर या उसका एजेंट तब तक खतरनाक वस्तु का पैकेज या ‘ओवरपैक’ हवाई परिवहन के लिए प्रस्तुत नहीं करेगा। जब तक यह सुनिश्चित न हो कि वह वस्तु निषिद्ध नहीं है। साथ ही, वस्तु को तकनीकी निर्देशों के अनुसार सही तरीके से वर्गीकृत, पैक, चिह्नित और लेबल किया गया हो। ‘ओवरपैक’ का मतलब है कि एक या अधिक पैकेज को एक साथ इस तरह रखा जाए कि उन्हें संभालना और रखना आसान हो। अगर ओवरपैक सही तरीके से तैयार नहीं किया गया, तो सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।
नए नियमों का असर
इन नए नियमों से विमानन उद्योग में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। एयरलाइंस, शिपिंग कंपनियां और लॉजिस्टिक एजेंसियों को अब पहले से अधिक सतर्क रहना होगा। सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के साथ-साथ यह कदम यात्रियों के विश्वास को भी बढ़ाएगा।






