इस गांव में देवर-भाभी खेलते है युद्ध जैसी होली, रंग की जगह करना होता है ये काम Unique Holi Tradition

Unique Holi Tradition: होली का पावन पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है। देशभर में इसकी तैयारियां तेज हो जाती हैं। भारत में हर राज्य और हर क्षेत्र में होली मनाने का तरीका अलग होता है। कहीं फूलों की होली खेली जाती ...

Ravi Yadav

Unique Holi Tradition: होली का पावन पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है। देशभर में इसकी तैयारियां तेज हो जाती हैं। भारत में हर राज्य और हर क्षेत्र में होली मनाने का तरीका अलग होता है। कहीं फूलों की होली खेली जाती है तो कहीं लठमार होली की परंपरा है।

उत्तर प्रदेश के बरसाने की लठमार होली दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन हरियाणा में भी एक ऐसी अनोखी होली खेली जाती है जो अपने अलग अंदाज के कारण चर्चा में रहती है। आज हम बात कर रहे हैं हिसार जिले के कुलेरी गांव की, जहां होली केवल रंग और पिचकारी तक सीमित नहीं रहती। बल्कि एक खास परंपरा के साथ मनाई जाती है।

कुलेरी गांव की खास पहचान

हरियाणा के हिसार जिले का कुलेरी गांव अपनी अनोखी होली के लिए जाना जाता है। यहां होली का उत्सव एक विशेष रस्म के साथ मनाया जाता है, जिसे स्थानीय लोग ‘कोड़ामार होली’ कहते हैं। इस परंपरा में गांव के लोग चौराहे पर इकट्ठा होते हैं और बड़े-बड़े कड़ाहों में रंग और पानी तैयार किया जाता है। इसके बाद एक अलग ही दृश्य देखने को मिलता है।

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क्या है कोड़ामार होली?

‘कोड़ामार होली’ में महिलाएं रस्सी या कपड़े से बने कोड़े लेकर आती हैं। एक तरफ पुरुष खड़े होते हैं और दूसरी ओर महिलाएं। फिर देवर और भाभी के बीच हंसी-मजाक के साथ होली खेली जाती है। इस दौरान महिलाएं पुरुषों पर हल्के-फुल्के कोड़े बरसाती हैं और पुरुष ढाल या कपड़े से खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से इसे युद्ध जैसी होली भी कहा जाता है। हालांकि यह सब पारंपरिक रीति-रिवाज और आपसी समझ के तहत होता है।

परंपरा की ऐतिहासिक जड़ें

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। यह केवल एक खेल नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। इस रस्म के पीछे सामाजिक जुड़ाव और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने की भावना जुड़ी हुई है। देवर-भाभी के रिश्ते में जो अपनापन और मजाक होता है, वह इस होली में साफ दिखाई देता है।

त्योहार में अनुशासन और मर्यादा

हालांकि इस होली में कोड़े चलाए जाते हैं, लेकिन यह सब मर्यादा और पारंपरिक नियमों के तहत होता है। गांव के लोग ध्यान रखते हैं कि किसी को चोट न पहुंचे और त्योहार का माहौल खुशहाल बना रहे। यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी है।

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रंगों से आगे की होली

कुलेरी गांव में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है। यहां यह पर्व रिश्तों की मिठास और लोक परंपराओं के संरक्षण का माध्यम है। गांव के युवा और बुजुर्ग सभी इस आयोजन में भाग लेते हैं, जिससे नई पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ी रहती है।

घरों में बनते हैं खास पकवान

होली के मौके पर हरियाणा के घरों में पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। घर-घर में मालपुआ, बेसन के लड्डू, गुजिया, मठरी और शकरपारे तैयार किए जाते हैं। इन पकवानों से त्योहार की मिठास और भी बढ़ जाती है।

संस्कृति और रिश्तों का त्योहार

कुलेरी गांव की कोड़ामार होली यह दिखाती है कि भारत में हर त्योहार की अपनी अलग पहचान है। यहां होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि रिश्तों, परंपराओं और सामुदायिक एकता का उत्सव है।

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