PM Kisan 22nd Installment: देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) की 22वीं किस्त को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने में 2,000 रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा सकती है।
हालांकि अभी तक सरकार की ओर से आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन विभागीय स्तर पर अंतिम प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी मिल रही है। ऐसे में किसान अब सरकार की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
कब आ सकती है 22वीं किस्त?
मिली जानकारी के अनुसार, होली के आसपास या मार्च के आखिरी सप्ताह तक किस्त जारी की जा सकती है। पिछली यानी 21वीं किस्त नवंबर 2025 में जारी की गई थी। जिसके बाद अब किसान अगली राशि का इंतजार कर रहे हैं। योजना के तहत हर चार महीने में 2,000 रुपये की किस्त जारी की जाती है। यदि सरकार मार्च में भुगतान करती है, तो यह तय समयसीमा के अनुसार होगा। आधिकारिक तारीख घोषित होते ही स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।
क्या है PM किसान योजना?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये दिए जाते हैं। यह राशि तीन बराबर किस्तों में, यानी हर चार महीने में 2,000 रुपये के रूप में दी जाती है। सबसे अहम बात यह है कि यह पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजा जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है और पारदर्शिता बनी रहती है।
किन किसानों को मिलेगा लाभ?
सरकार ने साफ किया है कि 22वीं किस्त का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा। जिनके सभी दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी हैं। विशेष रूप से e-KYC और जमीन सत्यापन को अनिवार्य कर दिया गया है। अगर किसी किसान ने अभी तक e-KYC पूरी नहीं की है या जमीन का रिकॉर्ड अपडेट नहीं है, तो उसका भुगतान रोका जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि सभी पात्र किसान अपनी स्थिति पहले ही जांच लें।
जरूरी है e-KYC
e-KYC प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य है। किसान इसे दो तरीकों से पूरा कर सकते हैं —
- ओटीपी आधारित e-KYC
- बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए
यदि e-KYC अधूरी है, तो सिस्टम में किस्त अटक सकती है। इसलिए जिन किसानों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, वे तुरंत करवा लें।
जमीन का सत्यापन भी जरूरी
योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलता है जिनके नाम पर खेती योग्य जमीन दर्ज है। जमीन का रिकॉर्ड सही और अपडेट होना चाहिए। यदि भूमि रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी है या नाम गलत दर्ज है, तो भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकारें समय-समय पर जमीन का डिजिटल सत्यापन करती हैं, इसलिए रिकॉर्ड सही रखना जरूरी है।
बैंक खाता और आधार लिंकिंग
तीसरी महत्वपूर्ण शर्त है कि बैंक खाता आधार से लिंक हो और DBT सक्रिय हो। अगर बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है या डीबीटी सक्रिय नहीं है, तो राशि ट्रांसफर नहीं हो पाएगी। कई बार तकनीकी कारणों से भी भुगतान रुक जाता है, इसलिए बैंक में जाकर स्थिति की पुष्टि कर लेना बेहतर रहता है।
किस्त का स्टेटस कैसे देखें?
किसान अपनी किस्त की स्थिति आसानी से ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए उन्हें आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर जाना होगा।
वहां ‘Know Your Status’ विकल्प चुनकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद स्क्रीन पर किस्त की स्थिति दिखाई देगी।
यदि स्टेटस में “FTO Processed – YES” लिखा दिखता है, तो समझ लें कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही पैसा खाते में आ सकता है।
अगर “FTO Processed – NO” दिखता है, तो इसका मतलब है कि अभी प्रक्रिया लंबित है या कोई समस्या है। ऐसे में किसान नजदीकी कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर संपर्क कर सकते हैं।
अफवाहों से बचें
हर बार किस्त जारी होने से पहले सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैलती हैं। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी घोषणा पर ही भरोसा करें। गैर-प्रमाणित संदेशों या फर्जी कॉल्स से सतर्क रहें। किसी भी जानकारी की पुष्टि pmkisan.gov.in पोर्टल से की जा सकती है।
अभी क्या करें किसान?
जिन किसानों ने अभी तक e-KYC, जमीन सत्यापन या बैंक लिंकिंग पूरी नहीं की है, वे तुरंत यह प्रक्रिया पूरी कर लें। अगर सभी दस्तावेज और प्रक्रिया सही हैं, तो 22वीं किस्त के 2,000 रुपये जल्द ही सीधे बैंक खाते में पहुंच सकते हैं। सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन संकेत यही हैं कि भुगतान प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
किसानों के लिए क्यों अहम है यह योजना?
देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना बड़ी राहत साबित हुई है। खेती में बढ़ती लागत, बीज और खाद की कीमतों के बीच हर चार महीने में मिलने वाली 2,000 रुपये की सहायता उन्हें आर्थिक सहारा देती है। यह राशि भले ही बड़ी न लगे, लेकिन समय पर मिलने पर यह खेती की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।






